शेरशाह सूरी विद्या भास्कर

ISBN:

Published: 1972

Paperback

104 pages


Description

शेरशाह सूरी  by  विद्या भास्कर

शेरशाह सूरी by विद्या भास्कर
1972 | Paperback | PDF, EPUB, FB2, DjVu, talking book, mp3, RTF | 104 pages | ISBN: | 9.43 Mb

किसी देश का इतिहास, बहुत अंश तक, उसके कतिपय विशिषट नर-नारियों का इतिहास है। उनहोंने ही उसको गढा संवारा और उसका विकास किया। जन-साधारण के लिए यह आवशयक है कि वह राषटरीय निरमाण के लिए महतवपूरण इन विभूतियों के बारे में जानकारी परापत करे।इसी उददेशय करमMoreकिसी देश का इतिहास, बहुत अंश तक, उसके कतिपय विशिष्ट नर-नारियों का इतिहास है। उन्होंने ही उसको गढ़ा संवारा और उसका विकास किया। जन-साधारण के लिए यह आवश्यक है कि वह राष्ट्रीय निर्माण के लिए महत्वपूर्ण इन विभूतियों के बारे में जानकारी प्राप्त करे।इसी उद्देश्य क्रम में श्री विद्या भास्कर लिखित ‘शेरशाह-सूरी’ का जीवनचरित पाठकों के सामने है। शेरशाह अपने समय का एक विशेष उल्लेखनीय राजव्यक्ति था। उसने शासन व समाज-संगठन में नई चीजें शुरू की जिनसे उसकी कल्पना शक्ति व संगठन क्षमता का परिचय मिलता है।



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